ख़ुशी (Hindi)

 एक जगह लगभग 300 लोग शारिरिक व मानसिक स्वास्थ्य पर एक कार्यशाला में सम्मिलित थे।कुछ समय  बाद वकता ने उपस्थिति सज्जनों से कहा कि अब हम एक गतिविधि करने जा रहे है।हर प्रतिभागी को एक गुब्बारा दिया गया और कहा गया कि वे उन पर अपना नाम लिख  दे।उन गुब्बारों को एक कमरे में रखवा दिया गया फिर उनसे कहा गया कि आप सब कमरे में प्रवेश कर अपने नाम लिखे गुब्बारे को पांच मिनिट में ढूंढे ओर मेरे पास लायें।लोग पागलों   की तरह एक दूसरे को धका ते हुए अपने  गुब्बारेको ढूंढ रहे थे । अंतोत्वगत्वा कोई भी अपना गुब्बारा प्राप्त नही कर सका।अब फिर एक गतिविधि की गई। लोगों से अपने गुब्बारे पर नाम लिखने को कहा गया ।फिर इन्हें कमरे में रखवा कर प्रतिभागियों से कहा गया कि उन्हें जो भी गुब्बारा मिले उस पर जो नाम लिखा है उस व्यक्ति को मेरे सामने  लाकर  दे दें। अब की बार कमरे में कोई पागलपन नही था। और हर व्यक्ति के पास उसका गुब्बारा पहुच गया था। और वह खुश था वक्ता ने फिर कहना शुरू किया और कहा कि जीवन मे जब हम एक दूसरे को गिराकर ,पागलों की तरह खुशियों को ढूंढते है तो हमे खुशियाँ नही मिलती। ख़ुशी व सुख हमें दूसरे को सुख व खुशी ढूढ़ने में मदद देने से ही मिलती है। दलाई लामा कहते है यदि आपको खुशी चाहिये तो दया व सहानुभूति का अभ्यास करें।। दूसरों की मदद करने से हमे ख़ुशी इसलिए मिलती है क्योंकि हमें  इससेअपने उद्देश्यपूर्ण होने का अहसास होता है। लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के एक अध्ययन से पता चला कि जितना आप दूसरों की मदद करते है उतने ही अधिक आप खुश होते है। शोधकर्ताओं द्वारा दो समूह के लोगों का सांख्यकीय अध्यन किया। एक समूह ऐसे लोगों का था जो किसी की मदद नही करता था ,ओर दूसरा मदद करने वालों का था। दूसरे समूह के लोगो मे खुश व प्रसन्न रहने का प्रसरण, विचरण दूसरे शब्दों में अधिक पाया गया। इसलिए हम कह सकते है दूसरों की मदद करने से हमे अधिक आंनद व सुख की प्राप्ति होती है

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Interdisciplinary Research and Global Development: A Portfolio of Work By: Lalit Mohan Shukla

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